हौज़ा न्यूज़ एजेंसी,ईरान की मजलिस-ए-ख़ुबरगान-ए-रहबरी ने सुप्रीम लीडर के हालिया संदेश का पूरी मजबूती से समर्थन किया है।
अपने बयान में कहा:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
إِنَّا مِنَ الْمُجْرِمِینَ مُنْتَقِمُونَ
निस्संदेह हम अपराधियों से बदला लेकर रहेंगे।(कुरआन)
इमाम ख़ुमैनी (रह.) ने फरमाया था कि मजलिस-ए-ख़ुबरगान, नेतृत्व को मज़बूत करने वाली संस्था है।
बयान में कहा गया है कि इस्लाम की शिक्षा के अनुसार शहादत, अल्लाह की बंदगी का सबसे ऊँचा दर्जा है। यह ईमान, ख़ुलूस (निष्ठा) और अल्लाह की राह में जिहाद का सर्वोच्च प्रतीक है। इस सच्चाई को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाना धार्मिक विद्वानों और इस्लामी नेताओं की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है।
परिषद ने कहा कि इमाम सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामनेई का हालिया संदेश, जो ईरान और इराक में शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब के ऐतिहासिक अंतिम संस्कार के बाद जारी हुआ, कुरआन और अहल-ए-बैत (अ.स.) की शिक्षाओं को दर्शाता है। यह संदेश आशूरा के संदेश को सम्मान, आज़ादी और प्रतिरोध के रास्ते से जोड़ता है।
बयान के अनुसार, इस संदेश में:
शहीदों के महान दर्जे का सम्मान किया गया है।
मुस्लिम उम्मत की एकता बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया है।
अल्लाह की राह में संघर्ष करने वालों के रास्ते को जारी रखने की बात कही गई है।
सब्र, हिम्मत और अल्लाह के वादों पर भरोसा रखने की शिक्षा दी गई है।
साथ ही, शहीद रहबर और रमज़ान के दौरान हुए युद्ध में मारे गए अन्य निर्दोष शहीदों के हत्यारों को सज़ा देने और उनके ख़ून का इंसाफ़ लेने की ज़िम्मेदारी पर भी ज़ोर दिया गया है।
परिषद ने कहा कि यह संदेश इस्लामी क्रांति के मूल सिद्धांतों और अहल-ए-बैत (अ.) की शिक्षाओं पर आधारित है।
अंत में, मजलिस-ए-ख़बरगान ने इस संदेश का पूरा समर्थन करते हुए कहा कि यह धार्मिक जागरूकता बढ़ाने, राष्ट्रीय एकता मज़बूत करने और इस्लामी क्रांति के उद्देश्यों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज़ है।
अंत में परिषद ने दुआ की कि आयतुल्लाह इमाम सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामनेई को अल्लाह लंबी उम्र, सफलता और इस्लामी उम्मत का मार्गदर्शन करने की ताक़त प्रदान करे।
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